Wednesday, August 26, 2009

सनातन शब्द का अर्थ क्या है ?

सिद्धि विनायक 

आइये अपने सनातन धर्म के विषय में भी कुछ जाने

आज मैंने अपने "सिद्धि विनायक " नाम के एक धार्मिक ब्लॉग की रचना की है। इस ब्लॉग में मैं सनातन धर्मं की बहुत ही रोचक व ज्ञानवर्धक जानकारियां उपलब्ध करवाने के लिए मैं सभी विद्वत् जनों से यथा सम्भव प्रयत्न करने के लिए प्रार्थना करूँगा ।
सनातन धर्म के विषय में कुछ भी लिखने से पूर्व मैंने बहुत सी धार्मिक पुस्तकों, पत्रिकाओं और इस क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संगठनो और उनके द्वारा सनातन धरम के प्रचार व प्रसार के लिए चलाई जा रही वेब साईट साइट्स और ब्लोग्स के साथ-साथ नेट पर उपलब्ध जानकारियों का भी अवलोकन किया।
सनातन धरम के कुछ बड़े संगठनों के साथ नेट पर मेल्स का आदान-प्रदान भी हुआ। उनकी वेब साईट पर प्रकाशित कुछ ज्ञान-वर्धक जानकारियों (विशेषकर हिंदी के कुछ वीडिओस) को सिद्धि-विनायक नाम के इस धार्मिक ब्लॉग पर पुनः प्रकाशित करने हेतु उनकी पूर्वानुमति भी मांगी गई ताकि किसी भी प्रकार से कॉपी-राइट नियमों का उल्लंघन न हो। और मुझे यह सुचना देते हुए बहुत ही हर्ष हो रहा है कि सभी ने मेरे इस कार्य के लिए मुझे बधाई के साथ-साथ पूर्वानुमति व भविष्य में भी हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी दिया है।
हम सभी का एकमात्र उद्देश्य तो सनातन धर्म का प्रचार और प्रसार ही तो है। फिर भी यदि मैं इस ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाली किसी विशेष जानकारी या जानकारियों को यदि किसी वेब-साईट, ब्लॉग या किसी पत्रिका आदि के सौजन्य से संकलित कर प्रकाशित करूंगा, तो उस वेब- साईट, ब्लॉग या पत्रिका का नाम अवश्य ही उस लेख या जानकारी के साथ ही प्रकाशित करूंगा ।
यह सिद्धि-विनायक ब्लॉग विशुद्ध रूप से इक व्यक्तिगत व धार्मिक ब्लॉग है और इसका किसी भी रूप से और किसी के भी साथ किसी भी प्रकार का कोई व्यवसायिक सम्बन्ध नहीं है ।
मैं इस ब्लॉग को कामयाब बनाने के लिए आप सभी के सुझाव व भेजी जाने वाली जानकारियां सहर्ष स्वीकार
करूँगा और वे प्रेषक के नाम से ही प्रकाशित की जायेंगी।

धर्म क्या है


"सनातन- धर्म"   शब्द का अर्थ क्या है ? 

 सनातन-धर्म के विषय में जानने में से पूर्व हमें सनातन और धर्म दोनों शब्दों का अलग-अलग अर्थ समझने की आवश्यकता होगी। सनातन शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है । जैसा की यह सर्व-विधित है की संस्कृत भाषा को देव- भाषा माना जाता है और इसे विश्व की सभी भाषाओँ की जननी भी कहा जाता है। विश्व के पुरातन और प्राचीनत्तम ग्रन्थ वेद , पुराण , उपनिषद और गीता आदि सभी की लिखित-रचना संस्कृत भाषा में ही हुई थी । तत्पश्चात् देवनागरी ,वर्तमान हिन्दी और अन्य भाषाओं में इनका अनुवाद हुआ था ।
संस्कृत भाषा में सनातन शब्द का अर्थ है सत्य, शिक्षाओं या परम्परा आदि । बहुत से विद्वान , संत , उपदेशक आदि सनातन शब्द का प्रयोग अजर,अमर, सार्वभौमिक ,सर्व-व्यापी, प्राचीनत्तम या आदि-अनंत-कालीन अर्थ के लिए भी सनातन शब्द का प्रयोग करते हैं ।
इस प्रकार मेरी समझ से सनातन शब्द का निकटत्तम अर्थ है : " सार्वभौमिक आदि-अनंत-कालीन सत्य'
अब धर्म शब्द का अर्थ जानने का प्रयत्न करते हैं। विभिन्न शब्द-कोषों, धार्मिक पुस्तकों व विद्वान लेखक जनों द्वारा धर्म शब्द का प्रयोग : मर्यादा , नीति , सिद्धांत , मार्ग , अनुशासन , कर्तव्य , नियम , मानना या पालन करना आदि के लिए किया जाता है। परन्तु वर्तमान समय में बहुत से विद्वान व गुणी-जन धर्म शब्द को धार्मिक-प्रतिबद्धता और पूजा-पाठ की पद्धत्ति के लिए भी प्रयोग करते हैं।
परन्तु मेरी समझ में धर्म शब्द का निकटत्तम शाब्दिक अर्थ अनुशासन या कर्तव्य ही है ।
अब यदि हम सनातन और धर्म शब्द को जोड़ दें तो अर्थ बनता है :

"सार्वभौमिक आदि-अन्नंत कालीन मर्यादित सत्य या कर्त्तव्य "
मेरे विचार से सनातन धरम के इस अर्थ  को हम प्राचीन व नवीन सभी सन्दर्भ में प्रयोग कर सकते हैं .सनातन-धर्म या सार्वभौमिक-धर्म  जिसे  वैदिक-धरम यानि वेदों का धरम भी कहा जाता है, यह पूजा-पद्धति न होकर ईश्वर के प्रति मनुष्य का कर्तव्य , कर्तव्यों का अभ्यास या जीवन के आचरण की संहिता (code of life ) है. यही वर्तमान समय में हिन्दू-धर्मं के नाम से अधिक प्रसिद्ध है . पुरातन काल में सनातन-धर्म के नाम से ही जाना जाता था.
सनातन धर्म (हिन्दू धर्म ) के बुनियादी सिद्धांतों को आसानी से परिभाषित नहीं किया जा सकता है. विश्व के अन्य सभी धर्म ,पंथ या सम्प्रदाए किसी व्यक्ति-विशेष या धार्मिक-पुस्तक या कहे गए वचनों के द्वारा किसी निश्चित काल में ही प्रतिपादित या आरम्भ हुए हें . इसके विपरीत सनातन-धर्म या हिन्दू-धर्म  किसी व्यक्ति-विशेष, पुस्तक,वचनों द्वारा या काल में आरम्भ नहीं हुआ.यह मान्यता है और विश्वाश भी किया जाता है कि  सनातन-धर्म विश्व का प्राचिनत्तम धर्म है . सभ्यताओं, संस्कृतियों और भौगोलिक-परिवर्तनों व कालांतर विभिन्न कारणों से  कुछ अन्य संस्कृतियों और जाति-नस्लों के समावेश होने के कारण भी समय-समय पर इसमें कुछ बदलाव आते रहे होंगे. इस प्रकार यह तो एक मानने योग्य सत्य है कि सनातन-धर्म हमारे पौराणिक ऋषि-मुनियों ने जप-तप-ध्यान-योग और युगों-युगों की कठिन-तपस्या व साधना से जीवन के शाश्वत सिद्धांतों की खोज व निर्धारित कर उन्हें स्वयं भी अपनाया व इसी प्रकार उनके आश्रम वासियों, व अन्य अनुसरण-कर्ताओं ने अपनाया. इस प्रकार सनातन-धर्म या वर्तमान में हिन्दू धर्म के नाम से प्रसिद्ध व प्रचलित धर्म - व्यक्तियों द्वारा स्थापित धर्म न होकर प्रधानतः मर्यादाओं व सिद्धांतों की पालना है और जो भी व्यक्ति इन आदि-अनंत काल से स्थापित सिद्धांतों व मर्यादाओं का उचित रूप से पालन करता है - वह हिन्दू कहलाता है .
हिन्दू शब्द पर हजारों-हजारों इतिहासकारों, खोजी -लेखकों, विवेचकों. विश्लेषकों व  शोध-कर्ताओं ने जो निष्कर्ष निकाले उसके अनुसार हिन्दू  शब्द की उत्पति पर तो अवश्य ही मतों पर मैं विभिन्नता है परन्तु हिन्दू शब्द के अर्थ पर प्राय सभी सहमत हैं कि - सनातन धर्म को मानने वाले हिन्दू हैं अर्थात हिन्दू धर्म को मानने वाले हिन्दू हैं.




( क्रमशः )

1 comment:

  1. Bahut Barhia...Blog ki dunia me aapka swagat hai... Isi Tarah Likhte rahiye.

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